बीड़ी का bundle
वही एक रोज़ समान लेने दुकान गया हुआ था , दूसरा नवरत्रा था , देवी के दिन , खैर में तो दुकान पर बेठा था जहा बनिया भीख भी उस बिखरी को देता जो दुआ पैसे की पढ़ता। शनि देव के कमंडल में तेल डालने के बाद प्लास्टिक का कप कूड़ेदान की जगह यूं ही फेंक देता। अब शनि देव खुश होंगे या दुखी ये तो शनि देव की सर दर्दी , मेरी सर दर्दी ये थी की समान निकालने में बहुत समय लग रहा था , बेठा और मैं कर भी क्या सकता था इसी बात पर बचपन में गलिया भी पढ़ जाया करती थी की समान जल्दी निकालने को बोलता नहीं है तभी इतना टाइम लगता है पर मेरी समझ के हिसाब से नाचने का भी कोई फाइदा है नहीं समान तो वेसे भी आ ही जाना है। आखिर दुआ तो में भी पैसे की लेके आया हु बनिए के घर। कई लोग आए मेरे बाद समान पहले ले गए पर असल में मेरी लिस्ट लंबी थी , पूजा संग्रही जो मुझे लेनी थी यूं तो में नास्तिक पर भगवान मिल जाए तो हाथ मिलने में क्या ही हर्जा। फिर देखा छोटी सी देवी खुद चलकर आ रही है , कांच की चूड़िया पहने सोने से रंग की खन खन करती , गुढी नीली जीन नीचे उसपर सफेद धागे की हल्की कढ़ाई , और पैरों में चपल उससे हल्का सा ऊपर छन छन करती पायल। 200...